Monday, 23 July 2018 23-Jul-2018

Category: Hindi

तनाव की प्राकृतिक चिकित्सा

Published by Ramlubhaya Aroda on   June 7, 2018 in   2018Hindi

चिंता ज्वाल सरीर बन, दावा लगि लगि जाय। प्रकट धुआं नहिं देखिए, उर अंतर धुंधुवाय॥ उर अंतर धुंधुवाय, जरै जस कांच की भट्ठी। रक्त मांस जरि जाय, रहै पांजरि की ठट्ठी॥ कह ‘गिरिधर कविराय, सुनो रे मेरे मिंता। ते नर कैसे जिए, जाहि तन व्यापे चिंता॥ लोक भाषा के गिरधर कविराय की छह पंक्तियों की

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यथार्थ और आभास

Published by Bhuvendra Tyagi on   May 29, 2018 in   2018Hindi

तेज दौड़ती जिंदगी में यथार्थ और आभासी जीवन आपस में कुछ इस कदर घुल-मिल गई हैं कि उनमें अंतर बहुत महीन हो गया है। इसका असर व्यक्तियों और समाज पर लाजिमी तौर पर पड़ रहा है। फेसबुक और वाट्सएप जैसी सोशल मीडिया साइट्स ने लोगों को इस तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया है कि

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सहज बने रहने में क्या है हर्ज…

Published by Suryabala on   April 14, 2018 in   2018Hindi

वर्धा से मुंबई की वह रेल यात्रा हमेशा याद रहेगी। अपनी बर्थ पर अकेली मैं और अगल बगल ऊपर नीचे की बर्थ पर तभी-तभी डिब्बे में घुसा एक मध्यवित्तीय महाराष्ट्रीयन परिवार। ठीक-ठाक सलवार, कुर्त्ते, चुन्नी वाली युवती मां, पिता, नौ दस वर्ष का बेटा और चार-छह की नन्हीं बेटी। कुछ बहुत आकर्षक या अनूठा जैसा

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भगवान बचाए इन हमदर्दों से

Published by Ghanshyam Agrawal on   February 19, 2018 in   2018Hindi

एक्सिडेंट के पश्चात जब मेरी आंख खुली, तो मैंने अपने आपको एक बिस्तर पर पाया। इर्द-गिर्द कुछ परिचित-अपरिचित चेहरे खड़े थे। मेरी आंख खुलते ही उनके चेहरों पर उत्साह व प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। मैंने कराहते हुए पूछा-‘मैं कहां हूं?’ ‘आप सरकारी अस्पताल में हैं। आपका एक्सिडेंट हो गया था। घबराने की बात नहीं,

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मित्रता

Published by डॉ. दीप्ति गुप्ता on   January 30, 2018 in   2018Hindi

यूं तो मित्रता पर आज तक बहुत कुछ कहा और लिखा गया है, लेकिन इस मृदुल-मधुर भाव को आज के कलयुग में बार-बार रिफ्रेश करने की, पुनर्जीवित करने की महती आवश्यकता है। जीवन का सबसे सुंदर, सबसे बेहतरीन और सबसे प्यारा रिश्ता ‘मित्रता’- इसके बारे में इंसान या तो निःशब्द रहकर, इसके सुकून भरे एहसास

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बच्चों को नसीहत नहीं, सलाह दें !

Published by भूवेन्द्र त्यागी on   August 9, 2017 in   Hindi

अक्सर माता-पिता अपने बच्चों का भला-बुरा सोचते समय इतने ‘पजेसिव’ हो जाते हैं कि अपनी हर बात उन पर थोपने लगते हैं । वे बच्चों के मन की थाह नहीं लेते । यह नहीं सोचते कि इसका उनके मन पर क्या असर होगा । ज्यादा टोका-टाकी या डांट-फटकार का उनके मन पर उलटा ही असर

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योग भगाये रोग | कालनिर्णय लेख

योग भगाये रोग

Published by योगाचार्य हंसराज यादव on   June 20, 2017 in   Health MantraHindi

सृष्टी रचनाकाल से मानव आधि और व्याधि से दुख पाता रहा है । जब शरीर में कफ, वात और पित्त असंतुलित हो जाते हैं, तब शारीरिक रोग हुआ करते हैं । जब मन में चिंता, ग्लानि, व्देष, क्रोध और ईर्ष्या होती है, तब मानसिक रोग हुआ करते हैं । इन्हें मनोकायिक रोग कहा जाता है

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फिल्म संगीत-इबादत से हिमाकत तक

फिल्म संगीत-इबादत से हिमाकत तक

Published by रविराज प्रणामी on   June 20, 2017 in   Hindi

संगीत इबादत है । कहते हैं संगीत यज्ञ है । ये कहा जा सकता है । अल्लाह तेरो नाम, कोई बोले राम राम कोई खुदाए, जैसे सूरज की गरमी से तपते हुए तन को, मन तड़पत हरि दर्शन को आज, इंसाफ का मंदिर है ये भगवान का घर है जैसे गीत बनते रहे तो लगता

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ऑनलाईन शॉपिंग के समय रखें इन बातों का ध्यान!

Published by जानवी दोशी on   May 23, 2017 in   Hindi

मोबाईल का स्मार्ट फोन हो जाने के बाद से ऑनलाईन शॉपिंग यानी बाजार का स्वरुप बदल गया है । यंग लोगों में इसका क्रेज बढ़ता नजर आ रहा है । कई ऑनलाईन शॉपिंग साइट्स खुल गये हैं अतः दुकानों की तरह ऑनलाइन पर बहुत से ऑप्शन हमें मिल गए हैं । इन दिनों Amazon, Flipkart,

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सफलता का शोर्टकट | एप्रिल - कालनिर्णय २०१६

सफलता का शॉर्टकट नहीं होता!

Published by  रिना त्यागी on   April 26, 2017 in   Hindi

पूरी दुनिया इस कहावत को जानती है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है । जीवन में सफलता पाने के लिए कड़े-परिश्रम के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है । सदियों से हर पीढ़ी अपने बाद आने वाली पीढ़ी को यही बात सिखाती आयी है कि सफलता बहुत कठोर परिश्रम से ही मिलती है

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